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PMS Hindi


पेरिमेनोपॉज़ल अवस्था: घबराएं नहीं सहजता से स्वीकारें

एक 32 वर्षीया अविवाहित महिला घबराई हुई सी अपनी जाँच रिपोर्ट्स के साथ दाख़िल हुई। उसे अनियमित माहवारी की समस्या थी। जाँच का परिणाम perimenopausal syndrome की ओर इंगित कर रहा था। 'मेनोपॉज़' शब्द पढ़कर वह स्तब्ध रह गयी थी। एक अच्छी कम्पनी में मैनेजर है, कैरियर के लिये शादी नहीं की थी। बच्चा भी प्लान करना था। ऐसे में उसकी चिंता स्वभाविक थी। यह पेरिमेनोपॉज़ल अवस्था है क्या, पहले आप ये समझ लें।
पेरिमीनोपॉज़ का अर्थ रजोनिवृत्ति या माहवारी बन्द होना नहीं है। यह एक संकेत है कि आपके अंडाशयों से मादा हॉर्मोन इस्ट्रोजन की उत्पादकता में कमी आ रही है जो कि अंडाणुओं के विकास, गर्भधारण और नियमित माहवारी के लिये आवश्यक हैं। पर इसका अर्थ यह नहीं है कि अब आप गर्भधारण नहीं कर सकतीं। पर हाँ, अब ज़्यादा विलम्ब किया तो समय के साथ साथ मुश्किलें बढ़ती जाएंगी और गर्भधारण कठिन होता जायेगा। और यदि आपका परिवार पूर्ण हो गया है तो इस अवस्था में भी गर्भनिरोधक उपाय जारी रखना आवश्यक हैं।
पेरिमीनोपॉज़(पूर्व रजोनिवृत्ति)-
रजोनिवृत्ति के कुछ वर्षों पहले शुरू हो जाने वाली वह प्रक्रिया जिसमें ओवरी धीरे धीरे इस्ट्रोजन हॉर्मोन का निर्माण कम कर देती है। इसकी अवधि 4 माह से लेकर 15 वर्ष तक की हो सकती है। हो सकता है अब से जो शुरुआत हुई हो तो मासिक दस वर्ष बाद रुके। यह अवस्था प्रत्येक महिला में अलग अलग होती है।
सामान्यतः जिस आयु में आपकी माता की रजोनिवृति हुई है, उसी के आसपास आपकी भी होने की संभावना रहती है। पर इसमें दूसरे बहुत से कारक भी काम करते हैं। ये सारी प्रक्रियाएं हॉर्मोन्स पर निर्भर हैं।
पूर्वरजोनिवृत्ति के लक्षण-
-अनियमित माहवारी
-शरीर में अचानक बहुत गर्मी की अनुभूति, अत्यधिक पसीना, चेहरा और गर्दन लाल होना, गर्म भभके उठते महसूस होना (हॉट फ्लेशेस)
-वज़न बढ़ना
-अकारण चिड़चिड़ापन, तबियत गिरी रहना, बेचैनी, तनाव (मूड स्विंग्स)
-थकान, आलस्य
-कामेच्छा में कमी
-अवसाद, एकाग्रता में कमी, जल्दी क्रोध आना
-योनि स्रावों में कमी के कारण सूखापन
चिकित्सा-
उपरोक्त लक्षण शरीर में हार्मोन्स के बदलाव के कारण प्रकट होते हैं। जिनको उचित खानपान, नियमित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर दूर किया जा सकता है।
याद रखिये ये पड़ाव हर महिला के जीवन में हमेशा से आता रहा है तो इसे जितने सहज भाव से स्वीकारा जाये समस्याएं उतनी कम आती हैं और दुष्प्रभावों युक्त दवाइयों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
मीनोपॉज़ की तीन अवस्थाएं होती हैं-
पूर्वरजोनिवृत्ति, रजोनिवृत्ति, पश्चात रजोनिवृत्ति।
इस दौरान ये उपाय अपनाएं-
-रेशे, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और कैल्शियम से भरपूर संतुलित भोजन करें।
-अधिक से अधिक शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन आपको चिरयौवना बनाए रखेगा।
-शक्कर, नमक, कैफीन, शराब का प्रयोग लगभग छोड़ दें। ये मोटापे के साथ साथ हार्मोन संतुलन भी गड़बड़ाते हैं।
-पीनट बटर, मछली, सूखे मेवे, ताज़े फल, दही, अंडे, दालें, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां उचित मात्रा में लें। ये मूड स्विंग, डिप्रेशन और चिड़चिड़ाहट से लड़ने में मददगार होते हैं साथ ही आपको ऊर्जावान भी बनाए रखते हैं।
-एक्सरसाइज़ न केवल फिट बनाती है बल्कि खुशी का एहसास कराने वाले हॉर्मोन्स भी स्रावित करती है जो आपके आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और भावनात्मक रूप से भी मज़बूती देते हैं।
-तनाव से दूर रहें। हार्मोन असंतुलन के कारण बेवजह की उदासी, रोना, अनचाहा/मूल्यहीन होने का भाव, हीन भावना आदि होते हैं। योग, प्राणायाम को नियम बनाएं।
-किसी मौके के इंतज़ार में रहने के बजाय यूँ ही ख़ुद की खुशी के लिये मनचाहे काम करें, अपना मेक ओवर, नया हेयरकट, शॉपिंग, खुद की ग्रूमिंग, हॉबी को समय दें, नये दोस्त बनाएं, नयी जगह घूमने जाएं।
-यदि लक्षण बढ़ें या स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या हो तो नज़रअंदाज़ किये बिना चिकित्सकीय परामर्श लें।
-डॉ नाज़िया नईम
इन्क्रेडिबल आयुर्वेद भोपाल