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बदलते मौसम में अच्छे स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद उपाय


इस समय ऋतु परिवर्तन का समय चल रहा है, जिसकी वजह से लोगों को सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, साइनस आदि समस्यायें बहुत अधिक हो रहीं हैं, कई बार इस तरह के लक्षण किसी संक्रमण या बैक्टीरिया की वजह से भी होने लगते है जिसकी वजह से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुन्या जैसे रोग हो जाते हैं, इनसे बचने के लिए लोग तुरंत एंटीबायोटिक्स या अन्य एलोपैथ की दवाएं खाने लगते हैं, जिनसे अधिकांश लोगों को इन समस्याओं में शुरुआती लाभ मिलने लगता है लेकिन उसके साथ-साथ कुछ नई समस्याएं शुरू हो जाती हैं जैसे: मुँह में कड़वापन , भूख लगना कम हो जाना, सिर में भारीपन, पेट साफ़ न होना, शरीर का वजन तेज़ी से गिरना आदि, इसके अतरिक्त यह रोग भी अधिकांश लोगों को थोड़े-थोड़े समय के बाद होते रहते हैं।

ज्यादातर लोग यह सोचते हैं की इन समस्याओं में ऐलोपैथ के अतरिक्त कोई अन्य तेज़ी से असर करने वाला विकल्प नहीं है व ऐलोपैथ दवाओं के सेवन के बाद जो परेशानिया होती हैं वह उनकी बीमारी के कारण है, जबकि सच्चाई यह है की न तो इस तरह की समस्याओं में ऐलोपैथ सबसे तेज़ विकल्प है और न ही इन दवाओं के सेवन के बाद होने वाली परेशानियां रोग के कारण होती है।

आयुर्वेद में इन समस्याओं का तेज़ व बिना किसी अन्य परेशानी के स्थायी समाधान उपलब्ध है, जागरूकता की कमी के चलते लोग अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं, जबकि इस तरह की समस्या होने पर इन बातों का ध्यान रखा जाये तो रोगी अपने रोग से मुक्त हो सकते हैं:

आयुर्वेद रोग के उपचार से अधिक उनसे बचने के तरीके पहले बताता है, जानिए उन तरीको को:
• अधिक से अधिक तरल (liquid ) चीज़ों का सेवन करना चाहिए।
• उबले हुए पानी का इस्तेमाल करना चाहिए, उबला पानी औषधि की तरह कार्य करता है।
• बाजार का खाना नहीं खाना चाहिए व तजा व आसानी से पचने वाले खाने का सेवन करें।
• अपने हाथों को अच्छे से धोयें।
• पंखे, कूलर, ए.सी. में न सोयें।
• ठन्डे पानी, आइसक्रीम, आइसक्रीम, शराब, मांस, मछली,अंडा, तली-भुनी चीज़ों जैसे-खस्ता, कचौड़ी छोले-भठूरे, समोसे, मिर्च-मसाले आदि का सेवन न करें।

चिकित्सा: 
इस रोग में आयुर्वेद में मुख्यतः दीपन, पाचन, लंघन व रसायन औषधियों का सेवन किया जाता है। 
आयुर्वेद में हज़ारों ऐसे योग हैं जिनके सेवन से रोग कम समय में पूर्ण रूप से सही होता है, अच्छे आयुर्वेद चिकित्सक से अपने रोग का उपचार करायें।
आयुर्वेद में तेज़ी से असर करने वाले योग जैसे लक्ष्मी विलास रस, त्रिभुवन कीर्ति रस, संजीवनी वटी, जयमंगल रस, अमृतारिष्ट, गोदन्ती भस्म, गिलोय सत्व, कालमेघासव, महासुदर्शन चूर्ण/ घन वटी, च्यवनप्राश आदि तीव्र असरकारक योग मौजूद हैं जिनके सेवन के पश्चात सर्दी, खांसी, जुकाम जैसे रोग 1 से 2 दिन में सही किये जा सकते हैं, पुराने बुखार या डेंगू , मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुन्या जैसे रोगों में भी 7 - 10 दिन में बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं, इन औषधियों के सेवन से एक विशेष लाभ यह होता है की ऐलोपैथ की औषधियों की तरह इनके सेवन से मुँह में कड़वापन , भूख लगना कम हो जाना, सिर में भारीपन, पेट साफ़ न होना, शरीर का वजन तेज़ी से गिरना आदि समस्याएं नहीं होती। 
(बिना किसी आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श के किसी भी औषधि का सेवन न करें)
आयुर्वेद अपना कर आप सभी रोग मुक्त हों, जय आयुर्वेद !! - डॉ.अभिषेक गुप्ता