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Constipation (Kabj)


Constipation (Kabj)
कब्ज / विबंध

कब्ज (constipation) की समस्या में अवश्य रखें इन बातों का ध्यान !


वर्तमान समय में कब्ज (constipation) की समस्या का होना एक आम बात है | 

इसका प्रमुख कारण हमारी जीवन शैली व आहार-विहार में बदलाव होना है |

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे खान-पान का नाम भी "फ़ास्ट-फ़ूड" हो गया है, यह फ़ास्ट फ़ूड जल्दी से तैयार हो जाता है शायद इसलिए इसका ऐसा नाम पड़ा हो लेकिन इस तरह के फ़ास्ट फ़ूड के रूप में लिए जाने वाले पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन आदि चीजो का पाचन भी जल्दी से होता हो ऐसा बिलकुल नहीं है| 

इस तरह के खान-पान के अतिरिक्त चाट, पकौड़ी, समोसे, छोले-भठूरे , राजमा, मांसाहार (Non - Veg ), शराब, सिगरेट , तम्बाकू , लाल मिर्च, बैंगन , अरबी , कटहल , आदि का सेवन भी शरीर के लिए बहुत नुकसान दायक होता है | अधिक मात्रा में चना, मूंगफली, जौ आदि रूखे आहार भी कब्ज को बढ़ने का कार्य करते हैं | 

ऐसे आहार हमारे पेट में जाने के बाद आसानी से नहीं पचते जिससे शरीर के पाचक तत्वों ( Enzymes ) को इन्हें पचाने के लिए अधिक ताकत लगानी पड़ती है व ऐसे आहार के सेवन से पाचक तत्व भी दूषित होने लगते है | आयुर्वेद में इन पाचक तत्वों को पाचक पित्त कहते है व आहार को पचाने में मदद करने वाली अग्नि को जठराग्नि कहते है |

जब शरीर की यह पाचन प्रक्रिया बिगड़ती है तब हमारे आंतो में मौजूद पाचक तत्व सूखने लगता है जिससे हमारी आंतो में रूक्षता बढ़ती है व शरीर में मौजूद वायु की गति जो की प्राकृतिक रूप से नीचे के रास्ते (गुदामार्ग) से निकलती है वह बिगड़कर या तो आंतो में ही रुक जाती है या ऊपर के रास्ते (मुखमार्ग) से निकलने का प्रयास करती है | ऐसी स्थिति में जब हम किसी चीज को खाते है तब एक तो उसका अच्छे से पाचन नहीं होता व दूसरा वायु की गति रुक जाने से आंतो में आने वाला पचा हुआ भोजन आगे नहीं बढ़ पाता इस अवस्था को कब्ज कहते है | 

• इस समस्या को प्रारंभिक अवस्था में नज़रअंदाज करने से कई बार पाइल्स, फिस्टुला, फिसर, एसिडिटी, गैस, सीने में जलन, पेट के अल्सर आदि परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है | 

• ज्यादातर लोग कब्ज की समस्या में त्रिफला , कायमचूर्ण जैसे मल को पतला करने वाली औषधि द्रव्यों का सेवन करते है | प्रारंभिक अवस्था में इनके प्रयोग करने से लाभ भी मिलता है लेकिन लम्बे समय में इन औषधियों के प्रयोग से समस्या और बढ़ जाती है क्योकि यह औषधियां कषाय होती हैं जिससे आंतो में रूक्षता और बढ़ती जाती है |

• कब्ज की समस्या में रेशेदार फल जैसे - पपीता , चीकू , अमरुद , संतरा, सब्जियां - पत्ता गोभी , पालक, टमाटर , ब्रोक्कली, आदि का सेवन करना चाहिए |
• दही , मट्ठे का सेवन, सूप, गुलकंद, पतली दाल - मूंग, मसूर की, खिचड़ी , पतला दलिया, देसी घी , अधिक मात्रा में ताजे पानी का सेवन करना लाभदायक होता है |
• किसी भी तरह के उपचार या औषधि के लिए आयुर्वेद डॉक्टर से परामर्श करें |
• आयुर्वेद में इस समस्या का स्थायी समाधान उपलब्ध है |

डॉo अभिषेक गुप्ता 
7861888100

 

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